राणा सांगा 1509 में मेवाड़ के उत्तराधिकारी बने

मेवाड़ :मेवाड़ के राजा राणा सांगा अचानक सुर्खियों में आ गए। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने राणा सांगा को लेकर विवादित बयान दिया, जिसके बाद यह मामला गरमा गया। अगर इतिहास के पन्नों में झांके तो राणा सांगा पर काफी कुछ लिखा गया है। लेकिन हम यहां राणा सांगा के बारे में जानेंगे, यह भी जानेंगे की उनकी सेना कैसी थी और कैसे उन्होंने बड़े-बड़े महारथियों को युद्ध के मैदान में धूल चटाई थी।

कब हुआ था जन्म, क्या था पूरा नाम?
भारत के इतिहास में राणा सांगा का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि राणा सांगा के बिना मेवाड़ का उल्लेख अधूरा है। मेवाड़ के एक शक्तिशाली और प्रसिद्ध राजा थे, जिन्होंने 16वीं शताब्दी में शासन किया था। राणा सांगा ने अपने शासनकाल में मेवाड़ का एक शक्तिशाली और समृद्ध राज्य बना दिया था। राणा सांगा का जन्म वर्ष 12 अप्रैल 1482 को मेवाड़ के चित्तौड़गढ़ में हुआ था। वह राणा रायमल के पुत्र थे और मेवाड़ के राजवंश के सदस्य थे। उनका पूरा नाम महाराणा संग्राम सिंह था लेकिन वे राणा सांगा के नाम से प्रसिद्ध हुए।

1509 में मेवाड़ के उत्तराधिकारी बने
पिता की मौत के बाद राणा सांगा 1509 में मेवाड़ के उत्तराधिकारी बने थे। मेवाड़ की सीमा पूरब में आगरा, दक्षिण में गुजरात की सीमा तक थी। उनकी सेना में 80 हजार घोड़े, 500 हाथी और करीब दो लाख पैदल सैनिक थे। दुश्मन उनके नाम से ही खौफ खाते थे। खातोली का युद्ध 1517 में दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी के नेतृत्व वाले लोदी वंश और राणा सांगा के नेतृत्व वाले मेवाड़ साम्राज्य के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को बुरी तरह हराया था। उसने 1518-19 में फिर से हमला करके राणा सांगा से बदला लेने की कोशिश की, लेकिन राणा सांगा ने उसे फिर से राजस्थान के धौलपुर में बुरी तरह से हरा दिया। इब्राहिम लोदी वहां से भाग गया।

राणा सांगा की सेना की खासियत यह थी कि उनका अनुशासन, नेतृत्व और सैन्य प्रशिक्षण बेहतरीन था। यही वजह थी कि राणा सांगा की सेना युद्ध में दुश्मनों पर शुरुआत से ही हावी रहती थी। इस सेना का अश्वदल बेहद मजबूत था। इस अश्व दल में 80 हजार घोड़े थे। यह युद्ध को निर्णायक मोड़ देने की क्षमता रखता था। वहीं राणा सांगा की पैदल सेना भी बहुत मजबूत थी। दो लाख पैदल सैनिक थे। वहीं राणा सांगा की सेना में 500 हाथी भी थे।
इब्राहिम लोदी को राणा सांगा ने कई बार हराया
इतिहासकारों की मानें तो उन्होंने दिल्ली मालवा, गुजरात के सुल्तानों के साथ 18 युद्ध लड़े और सभी में उन्हें जीत हासिल हुई। यह लड़ाई उन्होंने मेवाड़ की रक्षा के लिए लड़ी थी। इब्राहिम लोदी ने कई बार सांगा से युद्ध किया, लेकिन हर बार उसे हार का सामना करना पड़ा। इन युद्धों के कारण इब्राहिम ने आधुनिक राजस्थान में अपनी सारी ज़मीन खो दी। इसी समय, राणा सांगा ने आगरा में पीलिया खार तक अपना प्रभाव बढ़ाया। 16वीं शताब्दी की पांडुलिपि ‘पार्श्वनाथ-श्रवण-सत्तावीसी’ के अनुसार, राणा सांगा ने मंदसौर की घेराबंदी के ठीक बाद रणथंभौर में इब्राहिम लोदी को हराया था।

 

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