पीएम मोदी पहुंचे कीव, रूस यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान पर जेलेंस्की के साथ करेंगे चर्चा
पीएम मोदी राष्ट्रपति जेलेंस्की के निमंत्रण पर यूक्रेन आए हैं. कीव की यात्रा से लगभग छह सप्ताह पहले प्रधानमंत्री ने रूस की यात्रा की थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युद्धग्रस्त देश यूक्रेन की ऐतिहासिक यात्रा पर शुक्रवार को राजधानी कीव पहुंचे. देश के 1991 में स्वतंत्र होने के बाद से यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यूक्रेन यात्रा है.
इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर विचार विमर्श होने की उम्मीद है.
जून में हुई थी मोदी-जेलेंस्की मीटिंग
इससे पहले पीएम मोदी ने जून में इटली के अपुलिया में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान जेलेंस्की के साथ बातचीत की थी. बैठक में मोदी ने यूक्रेनी राष्ट्रपति को बताया कि भारत यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करने के लिए अपने साधनों के भीतर सब कुछ करना जारी रखेगा. उन्होंने कहा था शांति का रास्ता ‘बातचीत और कूटनीति’ के माध्यम से निकलता है.
इसी बैठक में यूक्रेनी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को कीव आने का निमंत्रण दिया.
6 हफ्ते पहले रूस गए थे पीएम मोदी
पीएम मोदी राष्ट्रपति जेलेंस्की के निमंत्रण पर यूक्रेन आए हैं. कीव की यात्रा से लगभग छह सप्ताह पहले प्रधानमंत्री ने रूस की यात्रा की थी. उनकी रूस यात्रा की अमेरिका और उसके कुछ पश्चिमी सहयोगियों ने आलोचना की थी.
ट्रेन से की 10 घंटे की यात्रा
प्रधानमंत्री दरअसल अपनी दो देशों की यात्रा के दूसरे और अंतिम चरण में यूक्रेना आए हैं हैं. वह पोलैंड से ‘रेल फोर्स वन’ ट्रेन से लगभग 10 घंटे की यात्रा करके कीव पहुंचे.
पोलैंड के प्रधानमंत्री से की बातचीत
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के साथ वार्ता के बाद पीएम मोदी ने गुरुवार को कहा कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ‘गहरी चिंता’ का विषय हैं. उन्होंने कहा कि शांति बहाल करने के लिए ‘बातचीत और कूटनीति’ ही आगे का रास्ता है.
‘युद्ध समस्या का समाधान नहीं’
पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत का यह दृढ़ विश्वास है कि युद्ध के मैदान में किसी भी समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता. किसी भी संकट में निर्दोष लोगों की जान जाना पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.’
पीएम मोदी ने वारसॉ में मीडिया को दिए एक बयान में कहा, ‘हम शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करते हैं. इसके लिए भारत अपने मित्र देशों के साथ मिलकर हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है.’