बसंत पंचमी जान लें पूजा का सबसे सही मुहूर्त

बसंत पंचमी मनाने की सही तारीख को लेकर इस साल खासी असमंजस है. कुछ पंचांगों के अनुसार 2 फरवरी को बसंत पंचमी मनाई जा रही है और कुछ के अनुसार 3 फरवरी को.

विद्या की देवी मां सरस्‍वती की पूजन का महापर्व बसंत पंचमी माघ शुक्‍ल पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस साल इस तिथि को लेकर बेहद उलझन है कि बसंत पंचमी 2 फरवरी को मनाएं या 3 फरवरी को. दरअसल, माघ शुक्ल की पंचमी तिथि का 2 फरवरी, रविवार को सुबह 11:53 बजे से आरंभ होगी और 3 फरवरी, सोमवार को दिन में 9:36 बजे तक व्याप्त रहेगी. ऐसे में 2 और 3 फरवरी दोनों ही पंचमी तिथि रहने से लोगों में कंफ्यूजन है कि किस दिन बसंत पंचमी मनाना सर्वश्रेष्‍ठ रहेगा.  जानिए बसंत पंचमी मनाने का शुभ मुहूर्त.

बसंत पंचमी 2025 तारीख और समय

चूंकि 3 फरवरी को ही सूर्योदय के समय बसंत पंचमी तिथि रहेगी. ऐसे में बसंत पंचमी मनाने का सर्वश्रेष्‍ठ मुहूर्त तो 3 फरवरी को ही है क्‍योंकि बसंत पंचमी पूजन के लिए उदयातिथि के आधार पर ही दिन का चुनाव होना चाहिए. यदि 2 फरवरी को ही बसंत पंचमी मना रहे हैं तो भी पूजा का शुभ मुहूर्त जानना जरूरी है.

2 फरवरी 2025 को बसंत पंचमी मनाने का शुभ मुहूर्त –  7 बजकर 9 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. इस दौरान दोपहर 12.13 से लेकर 12.56 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा.

3 फरवरी 2025 को बसंत पंचमी मनाने का शुभ मुहूर्त – वहीं 3 फरवरी को बसंत पंचमी की पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त सूर्योदय से सुबह 7 बजकर 40 मिनट तक रहेगा.

बसंत पंचमी स्‍नान

बसंत पंचमी के दिन प्रयागराज महाकुंभ पर्व का शाही स्नान भी होता है. पंचमी तिथि में गंगा स्नान करके दान, पुण्य, यज्ञ, हवन आदि करने से उत्तम गति एवं उत्तम फल की प्राप्ति होती है. पंचमी तिथि का आरंभ 2 फरवरी दिन में 11:53 के बाद से ही आरंभ हो जाने के कारण प्रयागराज के संगम तट पर गंगा एवं त्रिवेणी में स्नान 2 फरवरी को दिन में 11:53 बजे से ही आरंभ हो जाएगा जो सोमवार को पंचमी तिथि दिन में 9:36 बजे तक चलता रहेगा. इसके बाद भी दिन भर स्नान का लाभ मिलेगा. साथ ही इसी दिन से बसंत उत्सव प्रारम्भ हो जाता है.

बसंत पंचमी पर अद्भुत शुभ योग

इस साल बसंत पंचमी पर रेवती नक्षत्र रहेगा, साथ ही सिद्ध एवं साध्य साध्य योग भी पूरे दिन रहेगा. इस दिन ग्रहों की स्थिति भी अत्यंत महत्वपूर्ण योगों के साथ बन रही है. शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में, शनि देव अपनी राशि कुंभ में तथा देवगुरु बृहस्पति वृष राशि में रहेंगे. इस प्रकार बृहस्पति एवं शुक्र में राशि परिवर्तन राजयोग का भी निर्माण हो रहा है. जो इस दिन की महत्ता एवं सुविधा को बढ़ाने वाला होगा क्योंकि ग्रहों में दोनों गुरु दैत्य गुरु शुक्र एवं देवगुरु बृहस्पति एक-दूसरे की राशि में रहकर राशि परिवर्तन योग बना रहे हैं, जो बेहद फलदायी होता है.

बसंत पंचमी पर ये कार्य करना शुभ

बसंत पंचमी को अक्षय तृतीया की तरह शुभ कार्यों के लिए बेहद शुभ और अबूझ मुहूर्त माना गया है. बसंत पंचमी के दिन नामकरण संस्कार, अन्नप्राशन, कर्णवेधन,मुण्डन, अक्षरारंभ, उपनयन, सगाई, विवाह, नए व्‍यापार की शुरुआत, गृहप्रवेश, नई गाड़ी खरीदने जैसे शुभ कार्य करना बेहद शुभ होता है.

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