शिव भक्तों के लिए खुशखबरी!
कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भारत-चीन के बीच सहमति बन गई है. पांच साल बाद फिर से यह यात्रा शुरू होने वाली है.

कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भारत और चीन के बीच सहमति बन गई है. पांच साल के बाद बीजिंग में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों की बैठक हुई, जिसमें 6 मुद्दों पर सहमति बनी. भारत की ओर से इस मीटिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल तो चीन की तरफ से वहां के विदेश मंत्री वांग यी शामिल थे.इस अहम बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने सीमा विवाद पर विस्तृत चर्चा की. जिसमें इस बात पर समहति बनी कि कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होगी.
कहां से कहां तक होती है यात्रा?
कैलाश मानसरोवर यात्रा एक महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थ यात्रा है, जो हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखती है. यह यात्रा तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक जाती है.
ब्रह्मा जी ने की थी मानसरोवर झील की रचना
कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है. यह पर्वत तिब्बत के पश्चिमी क्षेत्र में हिमालय श्रृंखला का हिस्सा है, जिसकी ऊंचाई लगभग 6,638 मीटर है. जबिक, मानसरोवर झील को लेकर ऐसी मान्यता है कि इसकी रचना ब्रह्मा जी ने की थी. यह झील तिब्बत के उच्च पठार पर 4,590 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और कैलाश पर्वत से लगभग 30 किलोमीटर दूर है.
लिपूलेख दर्रे से होकर की जाती है यात्रा
इस यात्रा के दौरान तीर्थयात्री कैलाश पर्वत की परिक्रमा करते हैं और मानसरोवर झील में स्नान करते हैं, जिसे पवित्र और मोक्ष प्राप्ति का माध्यम माना जाता है. समुद्र तल से 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित लिपूलेख दर्रे से होकर यात्रा की जाती है.
जनवरी से शुरू हो जाती है यात्रा की तैयारी
कैलाश मानसरोवर यात्रा जून माह में शुरू होती है, लेकिन इसकी तैयारियां जनवरी से ही आरंभ हो जाती हैं. यह यात्रा शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, जिसके लिए तीर्थयात्रियों को अच्छी फिटनेस की आवश्यकता होती है.
कौन कर सकता है कैलाश मानसरोवर यात्रा?
कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वालों की न्यूनतम आयु 18 और अधिकतम 70 वर्ष होनी चाहिए.
बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 25 या उससे कम होना चाहिए.
यात्रा शुरू करने से पहले शारीरि रूप से स्वस्थ मेडिकल तौर पर फिट होना चाहिए.
6 महीन के लिए वैध भारतीय पासपोर्ट होना चाहिए.