आंध्र प्रदेश में 1,39,000 साल पुराने औजारों की खोज ने किया हैरान !

आंध्र प्रदेश में पत्थर के औजारों की खोज : आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में रेतलापल्ले गांव के पास खुदाई में पाषाण युग के औजार बरामद हुए हैं. पत्थर के बने औजार कम से कम 1,39,000 साल पुराने हैं.

आंध्र प्रदेश में पाषाण युग के पत्थर के औजारों की खोज : आंध्र प्रदेश में बेहद प्राचीन पत्थर के औजारों की खोज से वैज्ञानिक हैरान हैं. प्रकाशम जिले के रेतलापल्ले नामक गांव के पास खुदाई में ‘मध्य-पुरापाषाण काल’ के पत्थर के औजार मिले हैं. आर्कियोलॉजिस्ट्स के अनुसार, ये औजार 1,39,00 साल पुराने हैं. औजारों का इतना प्राचीन होना हमारी उस अवधारणा को खारिज करता है कि केवल आधुनिक मानव ही ऐसे औजार बना सकता था. रिसर्च करने वाली भारतीय और जर्मन वैज्ञानिकों की एक टीम यह नहीं बता सकी कि ये औजार बनाए किसने थे. उनकी खोज के नतीजे इसी हफ्ते प्लॉस वन जर्नल में छपे हैं.

क्यों हैरान करती है यह खोज?

रेतलापल्ले के नजदीक खुदाई के दौरान, सैकड़ों पत्थरों का जखीरा मिला जो अंडाकार, त्रिकोणीय या नुकीले औजारों के रूप में गढ़े गए थे. यह खोज इसलिए चकित करती है क्योंकि उस समय तक होमो सेपियंस या आधुनिक मानव अफ्रीका से निकलकर दक्षिण एशिया नहीं पहुंचे थे. वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह खोज उस धारणा को मजबूत करती है कि मानव के कुछ विलुप्त पूर्वजों ने भी पत्थर से औजार बनाने की कला सीखी थी.

खुदाई की कमान बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर अनिल देवड़ा ने संभाल रखी थी. उन्होंने ‘द टेलीग्राफ’ से बातचीत में कहा कि रेतलापल्ले में औजार बनाने वालों की पहचान एक रहस्य बनी हुई है.’

क्या है इन औजारों के निर्माताओं का रहस्य?

रेतलापल्ले के पास मिले औजारों से जो रहस्य गहराया है, उसकी कहानी कोई दो दशक पहले शुरू हुई थी. चेन्नई के पास अथिरामपक्कम नाम की प्रागैतिहासिक साइट से भी कुछ ऐसे ही औजार मिले थे. अथिरामपक्कम से मिले औजार 372,000 से 170,000 साल पुराने माने जाते हैं. लेकिन ढाई दशक पहले सामने आए जेनेटिक सबूत कहते हैं कि हम और आप उन आधुनिक मनुष्यों के वंशज हैं जो 60,000 से 70,000 साल पहले अफ्रीका से बाहर निकले थे.

कोई 10 साल पहले, आंध्र प्रदेश के ज्वालापुरम में खुदाई के दौरान 77,000 साल पुराने पत्थर के औजार मिले थे. इसी आधार पर, कुछ रिसर्चर्स कहते हैं कि भारत में होमो सेपियंस शायद 125,000 साल पहले भी रहता था.

भारत में इससे भी प्राचीन औजार मिले हैं

अथिरामपक्कम से इससे कहीं अधिक प्राचीन औजार भी मिले हैं. शर्मा सेंटर फॉर हेरिटेज एजुकेशन के वैज्ञानिक शांति पप्पू और कुमार अखिलेश ने वहां से 15 लाख साल पुराने औजार खोज निकाले थे. कर्नाटक में भी एक जगह से 12 लाख साल पुराने औजारों को ढूंढ़ निकाला गया. हालांकि, इन्हें ‘ऐचुलियन’ औजारों की श्रेणी में रखा जाता है, जो होमो इरेक्टस (मानव की विलुप्त पूर्वज प्रजाति) ने बनाए थे. होमो इरेक्टस 16 लाख साल पहले से लेकर कम से कम 250,000 साल पहले तक अफ्रीका और एशिया में घूमते थे.

 

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