संसद में तड़के 3.45 बजे अमित शाह ने बताया क्या थी मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की असली वजह
अमित शाह ने साफ किया कि मणिपुर की हिंसा की जड़ एक अदालती फैसला था जिसमें एक विशेष जाति को आरक्षण दिया गया था. यह फैसला बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक दिया गया लेकिन तब तक हालात बिगड़ चुके थे.

संसद ने शुक्रवार तड़के मणिपुर में लागू राष्ट्रपति शासन की पुष्टि करने वाले सांविधिक संकल्प को पारित कर दिया. यह संकल्प केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में पेश किया जिसे ध्वनिमत से पारित किया गया. इससे पहले लोकसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी थी. मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था जिसे दो महीने के भीतर संसद से मंजूरी दिलाना संवैधानिक अनिवार्यता थी.
राज्यपाल ने सभी विधायकों से चर्चा की
असल में मणिपुर में यह चर्चा तड़के करीब पौने चार बजे हुई है. गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि मणिपुर के मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद राज्यपाल ने सभी विधायकों से चर्चा की. अधिकतर विधायकों ने कहा कि वे सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं. इसके बाद केंद्र सरकार की कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी. अमित शाह ने यह भी कहा कि मणिपुर में हालात अब बेहतर हैं पिछले चार महीनों में एक भी मौत नहीं हुई और केवल दो लोग घायल हुए हैं.
‘मणिपुर की हिंसा की जड़ एक अदालती फैसला’
अमित शाह ने साफ किया कि मणिपुर की हिंसा की जड़ एक अदालती फैसला था जिसमें एक विशेष जाति को आरक्षण दिया गया था. यह फैसला बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक दिया गया लेकिन तब तक हालात बिगड़ चुके थे. गृह मंत्री ने विपक्ष से अपील की कि मणिपुर के मुद्दे पर राजनीति न की जाए और सभी दल मिलकर शांति स्थापना में सहयोग करें. उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकता पुनर्वास और लोगों के जख्मों पर मरहम लगाना है.
इस संकल्प पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री अब तक मणिपुर नहीं गए जबकि वहां इतने लंबे समय से हिंसा हो रही है. तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने भी आरोप लगाया कि मणिपुर के हालात खराब होने के बावजूद प्रधानमंत्री की उदासीनता चिंता का विषय है. दोनों नेताओं ने मणिपुर में बीजेपी सरकार को पूरी तरह विफल बताया.